Friday, 27 July 2012

लंदन ओलंपिक: महाकुम्भ का आगाज

भारत समयनुसार रात में एक बजकर 30 मिनट पर बेहद भव्य, आकर्षक और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ 30वें ओलंपिक खेल शुरू हो गये महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने लगभग 100 राष्ट्रप्रमुखों सहित 80 हजार दर्शकों की मौजूदगी में ओलंपिक खेलों के शुरुआत की घोषणा की। इसके साथ ही आसमान आतिशबाजी और रोशनी से नहा गया इससे पहले लंदन में ओलंपिक खेल दो बार (1908 और 1948) आयोजित हो चुके हैं. इस समारोह का नाम आयल्स ऑफ़ वंडर रखा गया है इस समारोह को निर्देशन मशहूर फिल्म निर्देशक डैनी बॉयल की देखरेख मैं हुआ इस मार्च पास्ट में भारत की टीम का नेतृत्व किया ध्वज वाहक पहलवान सुशील कुमार ने किया इस खेल महाकुंभ में 204 देशों के लगभग 10,500 खिलाड़ी अपना सपना साकार करने की कोशिश करेंगे ओलंपिक 17 दिन तक चलेगा जिसमें 39 खेलों में खिलाड़ी अपना भाग्य आजमाएंगे।ओलंपिक की शुरुआत 1896 में एथेन्स से हुई थी और इसलिए जब 204 देशों का मार्च पास्ट शुरू हुआ तो हमेशा की तरह सबसे पहले यूनानी टीम ने स्टेडियम में कदम रखा 108 वें देश के तौर पर भारत का नाम पुकारा गया। तब तिरंगा लिए पहलवान सुशील कुमार और पूरा दल दिखा। भारत के दल में महिलाओं ने पीले रंग की साड़ी पहनी थी। पुरुषों ने काले कोट, पीले साफे के साथ नीली टाई भी पहनी

आखिर में मशाल जलाने का कायक्रम हुआ। मशाल लेकर टेम्स नदी में इंग्लैंड के पूर्व फुटबॉल कप्तान डेविड बेकहम बेमिसाल अंदाज में नजर आए। उसके बाद टार्च की स्टेडियम में एंट्री की गई महाकुंभ का शानदार आगाज को हो चुका है और उम्मीद है कि अंजाम भी बेहतरीन होगा। जब 12 अगस्त को खेल खत्म होंगे तब तक हिंदुस्तान की झोली में भी कई मेडल गिर चुके होंगे

Thursday, 26 July 2012

असम के दंगो में फंसे 30 हजार रेलयात्री


37 ट्रेनों में करीब 30 हजार यात्री असुरक्षित तमाम ट्रेनें रास्ते में खड़ी हिंसाग्रस्त क्षेत्र में रेल यातायात में पड़े व्यवधान पर रेलमंत्री मुकुल रॉय ने गृहमंत्री पी.चिदंबरम और असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से फोन पर बात कर रेलयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है । असम में 37 ट्रेनों में करीब 30 हजार यात्री असुरक्षित और अभावों के हालात में बीच रास्ते में फंसे हैं। रेलमंत्री ने कहा कि असम की हिंसक घटनाओं का असर रेल यातायात पर पड़ा है। तमाम ट्रेनें रास्ते में खड़ी हैं जबकि दर्जनों बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं। असुरक्षित हालातमें रेलवे को 26 ट्रेनें रद करनी पड़ी हैं। रेल यातायात में सबसे ज्यादा बाधा श्रीरामपुर और सलाकाटी रेलवे स्टेशनों के बीच के 54 किलोमीटर के रूट पर आई है जहां ट्रेनें लंबे समय से खड़ी हैं। रेलवे इन यात्रियों के खानपान का इंतजाम कर रहा है। 37 ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों पर रुकी हुई हैं। रास्ते में फंसी ट्रेनें रास्ते में फंसी व विलंबित ट्रेनों में डिब्रूगढ़ कामरूप एक्सप्रेस, गुवाहाटी गरीब रथ, नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी, नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस, कामाख्या एक्सप्रेस, अवध असम एक्सप्रेस, सिकंदराबाद-गुवाहाटी एक्सप्रेस, गया एक्सप्रेस, गुवाहाटी-बेंगलूर एक्सप्रेस, डिब्रूगढ़-दिल्ली ब्रह्मपुत्र मेल, गुवाहाटी-हावड़ा सरायघाट एक्सप्रेस तथा गुवाहाटी-जम्मू तवी एक्सप्रेस शामिल हैं।

स्त्रोत्र-भारतीय रेलवे

बलात्कार कानूनों की समीक्षा

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आपराधिक कानून
(संशोधन) विधेयक, 2012 को संसद में पेश करने
के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
भारत के कानून आयोग ने ‘बलात्कार
कानूनों की समीक्षा’’ के बारे में
अपनी 172वीं रिपोर्ट में तथा राष्ट्रीय
महिला आयोग ने यौन उत्पीड़न जैसे अपराध के
लिए कठोर सजा देने की सिफारिश की थी।
केन्द्रीय ग़ृह सचिव की अध्यक्षता में गठित
उच्चस्तरीय समिति ने इस विषय पर कानून
आयोग की सिफारिशों, राष्ट्रीय महिला आयोग
और विभिन्न जगहों से मिले सुझावों पर गौर
करते हुए आपराधिक कानून(संशोधन) विधेयक,
2011 के मसौदे के साथ अपनी रिपोर्ट
दी थी और सरकार से कानून बनाने
की सिफारिश की थी। इसके मसौदे पर
महिला और बाल विकास मंत्रालय तथा कानून
और न्याय मंत्रालय के साथ विचार विमर्श
किया गया और आपराधिककानून(संशोधन)
विधेयक, 2012 का मसौदा तैयार किया गया।
विधेयक की प्रमुख बातों के अनुसार भारतीय दंड
संहिता की वर्तमान धाराओं 375, 376,
376ए, 376बी, 376सी और 376डी के
स्थान पर अनुच्छेद 375, 376, 376ए और
376बी जगह लेंगे। इसमें ‘बलात्कार’’ शब्द
जहां कहीं भी हो, उसके स्थान पर ‘’यौन
उत्पीड़न’’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा,
ताकि यौन उत्पीड़न अपराध में लिंग भेद से
बचा जा सके और इस अपराध
का दायरा भी बढ़ाया जा सकें।
यौन उत्पीड़न के लिए न्यूनतम सात वर्ष
की सजा होगी, जिसे आजीवन कारावास तक
बढ़ाया जा सकता है। साथ ही जुर्माने
का भी प्रावधान होगा। यौन उत्पीड़न के
अधिक संगीन मामले यानी अपने अधिकार क्षेत्र
में किसी पुलिस अधिकारी या लोक सेवक/प्रबंधक
या अपने पद का फायदा उठाने वाले
किसी भी व्यक्ति के इसमें शामिल होने पर उसे
कठोर सजा दी जाएगी, जो दस वर्ष से कम
नहीं होगी और जिसे आजीवन कारावास में
तब्दील किया जा सकता है, इसके अलावा जुर्माने
की भी व्यवस्था होगी। यौन उत्पीड़न मामले में
सहमति की आयु 16 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष कर
दी गई है, लेकिन किसी पुरूष द्वारा 16 वर्ष
की आयु की अपनी पत्नी के साथ संभोग करने
को यौन उत्पीड़न नहीं माना जाएगा। एसिड से
हमला करने के लिए सजा बढ़ाने का प्रावधान
भी किया गया है

रतन टाटा ने आज भारत के नेताओ के गाल पर करारा तमाचा मारा है


टाटा मोटर ने आज पकिस्तान सरकार की ३८० टाटा सुमो के आर्डर को ठुकरा दिया , अगर भारत के सभी व्यापारी , आम जनता और सरकार पकिस्तान का इस तरह से आर्थिक और सामजिक हिसकार करे तो पाक को अपनी नानी याद आ जाएगी ! रतन टाटा के इस कदम को जितना भी स्वागत किया जाए वो कम है ! सच्चे देश भक्त इसे ही कहते है !दूसरी तरफ भारत की सरकार है जिसे पता है की भारत मेंबम विस्फोट में पाक का हाथ है फिर भी किरकेट के बहाने दोस्ती करने को बेचैन है ! टाटा ने खुले शब्दों में कहा है की जिस देश की भारत में आतंक वाद फैलाने में सीधी भूमिका रही हो उसके साथ किसी भी हाल में व्यापार हम नहीं कर सकते ! काश, सभी सोच रतन टाटा की तरह होती गर्व है आप पर रतन टाटा

ग्लोबल वार्मिग से अछूते हैं काराकोरम के ग्लेशियर

लंदन। एक नए अध्ययन से पता चला है
कि उत्तरी पाकिस्तान मे दिरांन व
राकापोशी चोटियों के बीच स्थित काराकोरम
ग्लेशियर अभी तक ग्लोबल वार्मिग के प्रभाव से
बचे हुए हैं।
ऐसे समय में जबकि पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिग
की चपेट में है और इस इलाके समेत दुनिया के
तमाम ग्लेशियरों की बर्फ पिघल रही है, यह
ग्लेशियर और बड़ा हो रहा है। फ्रांस के अध्ययन
कर्ताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि इस
ग्लेशियर पर जलवायु बदलाव का कोई फर्क
नहीं पड़ा है।
इस अध्ययन को करने वाले फ्रांस की डे तोलस
विश्वविद्यालय के दल के एटिन बर्दियर ने एक
जर्नल नेचर जियो साइंस में बताया है कि अब वे
लोग स्थानी जलवायु व वायुमंडल के मॉडल
का गहन अध्ययन करेगे, ताकि इस ग्लेशियर के
ग्लोबल वार्मिग से बचे रहने की वजह
का पता चल सके।
उन्हे उम्मीद है कि वे अपने इस सर्वे को हिमालय
के बाकी इलाकों में भी कर सकेंगे,
ताकि ग्लेशियरों की तुलना करने के लिए उन्हे
विस्तृत और एक समान आंकड़े मिल सकें।
उत्तरी पाकिस्तान व पश्चिमी चीन में
काराकोरम रेज के 5,615 किलोमीटर के दायरे
में किए गए इस अध्यन में इस दल ने
पाया कि 1999 से 2008 के बीच यहां बर्फ
की परत में 0.11 मीटर
की बढ़ोतरी हो चुकी है।
इससे पहले के अध्ययनों में
कहा गया था कि काराकोरम ग्लेशियर भी इस
इलाके के बाकी ग्लेशियरों की तरह ही पिघल
रहा है, इसके चलते समुद्र में पानी का स्तर
को बढ़ जाएगा