Thursday, 26 July 2012

बलात्कार कानूनों की समीक्षा

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आपराधिक कानून
(संशोधन) विधेयक, 2012 को संसद में पेश करने
के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
भारत के कानून आयोग ने ‘बलात्कार
कानूनों की समीक्षा’’ के बारे में
अपनी 172वीं रिपोर्ट में तथा राष्ट्रीय
महिला आयोग ने यौन उत्पीड़न जैसे अपराध के
लिए कठोर सजा देने की सिफारिश की थी।
केन्द्रीय ग़ृह सचिव की अध्यक्षता में गठित
उच्चस्तरीय समिति ने इस विषय पर कानून
आयोग की सिफारिशों, राष्ट्रीय महिला आयोग
और विभिन्न जगहों से मिले सुझावों पर गौर
करते हुए आपराधिक कानून(संशोधन) विधेयक,
2011 के मसौदे के साथ अपनी रिपोर्ट
दी थी और सरकार से कानून बनाने
की सिफारिश की थी। इसके मसौदे पर
महिला और बाल विकास मंत्रालय तथा कानून
और न्याय मंत्रालय के साथ विचार विमर्श
किया गया और आपराधिककानून(संशोधन)
विधेयक, 2012 का मसौदा तैयार किया गया।
विधेयक की प्रमुख बातों के अनुसार भारतीय दंड
संहिता की वर्तमान धाराओं 375, 376,
376ए, 376बी, 376सी और 376डी के
स्थान पर अनुच्छेद 375, 376, 376ए और
376बी जगह लेंगे। इसमें ‘बलात्कार’’ शब्द
जहां कहीं भी हो, उसके स्थान पर ‘’यौन
उत्पीड़न’’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा,
ताकि यौन उत्पीड़न अपराध में लिंग भेद से
बचा जा सके और इस अपराध
का दायरा भी बढ़ाया जा सकें।
यौन उत्पीड़न के लिए न्यूनतम सात वर्ष
की सजा होगी, जिसे आजीवन कारावास तक
बढ़ाया जा सकता है। साथ ही जुर्माने
का भी प्रावधान होगा। यौन उत्पीड़न के
अधिक संगीन मामले यानी अपने अधिकार क्षेत्र
में किसी पुलिस अधिकारी या लोक सेवक/प्रबंधक
या अपने पद का फायदा उठाने वाले
किसी भी व्यक्ति के इसमें शामिल होने पर उसे
कठोर सजा दी जाएगी, जो दस वर्ष से कम
नहीं होगी और जिसे आजीवन कारावास में
तब्दील किया जा सकता है, इसके अलावा जुर्माने
की भी व्यवस्था होगी। यौन उत्पीड़न मामले में
सहमति की आयु 16 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष कर
दी गई है, लेकिन किसी पुरूष द्वारा 16 वर्ष
की आयु की अपनी पत्नी के साथ संभोग करने
को यौन उत्पीड़न नहीं माना जाएगा। एसिड से
हमला करने के लिए सजा बढ़ाने का प्रावधान
भी किया गया है

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